दादा जी बतलाओ तो
पढ्ना बहुत जरूरी क्यों
पापा सोते रहते पर
हमको सुबह उठा देते
ज़रा ज़रा सी बातों पर
हमको डाँट लगा देते
यदि हम बच्चे दादाजी
फ़िर बचपन से दूरी क्यों, दादाजी बतलाओ तो
मौसम चाहे कोई हो
उठ्कर सुबह नहाना है
गरमी बारिश सरदी में
हमको पढ्ने जाना है
कोई नहीं बताता है
आखिर ये मजबूरी क्यो,दादाजी बतलाओ तो
भूलो सारे खेलों को
हटें न आँखे पुस्तक से
बचपन तक मुर्झाया है
इन सबकी इस चकचक से
खेल कूद को मस्ती को
छुट्टी मिली न पूरी क्यो, दादाजी बतलाओ तो
पढ्कर मानव,मानव है
सच है यही इसे जानो
दादाजी ने समझाया
अनपढ तो ज्यों पशु मानो
समझ गये हम दादाजी
पढना बहुत जरूरी क्यों
-डा० अजय जनमेजय
पढ्ना बहुत जरूरी क्यों
पापा सोते रहते पर
हमको सुबह उठा देते
ज़रा ज़रा सी बातों पर
हमको डाँट लगा देते
यदि हम बच्चे दादाजी
फ़िर बचपन से दूरी क्यों, दादाजी बतलाओ तो
मौसम चाहे कोई हो
उठ्कर सुबह नहाना है
गरमी बारिश सरदी में
हमको पढ्ने जाना है
कोई नहीं बताता है
आखिर ये मजबूरी क्यो,दादाजी बतलाओ तो
भूलो सारे खेलों को
हटें न आँखे पुस्तक से
बचपन तक मुर्झाया है
इन सबकी इस चकचक से
खेल कूद को मस्ती को
छुट्टी मिली न पूरी क्यो, दादाजी बतलाओ तो
पढ्कर मानव,मानव है
सच है यही इसे जानो
दादाजी ने समझाया
अनपढ तो ज्यों पशु मानो
समझ गये हम दादाजी
पढना बहुत जरूरी क्यों
-डा० अजय जनमेजय