Sunday, January 30, 2011

दादा जी बतलाओ तो

दादा जी बतलाओ तो
पढ्ना बहुत जरूरी क्यों
पापा सोते   रहते    पर
हमको सुबह उठा देते
ज़रा ज़रा सी बातों पर
हमको डाँट   लगा देते
यदि हम बच्चे दादाजी
फ़िर बचपन से दूरी क्यों, दादाजी बतलाओ तो
मौसम    चाहे कोई हो
उठ्कर सुबह नहाना है
गरमी बारिश सरदी में
हमको पढ्ने    जाना है
कोई    नहीं    बताता है
आखिर ये मजबूरी क्यो,दादाजी बतलाओ तो
भूलो     सारे    खेलों को
हटें न आँखे पुस्तक से
बचपन तक मुर्झाया है
इन सबकी इस चकचक से
खेल कूद को मस्ती को
छुट्टी मिली न पूरी क्यो, दादाजी बतलाओ तो
पढ्कर मानव,मानव है
सच है यही इसे जानो
दादाजी  ने     समझाया
अनपढ तो ज्यों पशु मानो
समझ गये हम दादाजी
पढना बहुत जरूरी क्यों


-डा० अजय जनमेजय

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