Monday, December 24, 2012

कुहरे की चादर ====
२४-१२-२०१२ 

कुहरे की चादर हटी ,मिली धरा को धुप |
चहरे सबके खिल उठे , पाया रूप अनूप |
पाया रूप अनूप , छतों  पर दिए दिखाई |
लिए हाथ में बेट , टीम  बच्चों  की आई |
बहुत दिनों के बाद ,दिखा गंगा का खादर |
निकली प्यारी धूप ,फाड़ कुहरे की चादर 

डॉ ० अजय जनमेजय 

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