Sunday, December 23, 2012

गुट बंदी दल के लिए ,है जी का जंजाल |
हर दल को दलदल बना ,कर देती कंगाल |
कर देती कंगाल ,एकता बात न सूझे |
विघटन होते रोज़ ,प्यार कब कोई  बूझे |
नियम ,सोच ,सम्मान ,साथ में हो पावंदी |
प्रथम सोच गर देश ,न पनपे फिर गुट बंदी 

              (२)
ढेले -ढेले है सजा ,क्या  सुन्दर  अमरुद |
गुण से ही है बच सका ,इसका आज बजूद |
इसका  आज बजूद ,भरे गुण इतने सारे |
रोगी जिनका पेट ,ये उनके कष्ट  निवारे |
मिले नगर ओ गाँव ,कहीं भी कोई लेले |
गज़ब  जायकेदार  , लदे  हैं  सारे   ढेले |

          (३)
जाड़े  आये  सज गया , पटरी  का  बाज़ार |
मुफ्लिस के भी घर मना ,आज एक त्यौहार |
आज एक  त्यौहार , गरम  कपडे  वो लाया |
खुश बच्चों को देख ,सुकू ,इक दिल में पाया |
सिकुड़ा  देख  गरीब , ठण्ड  भी  पढ़े  पहाड़े  |
धनवानों  की  मौज , रंक  के  दुखिया जाड़े ||

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