23-12-2012
गज़क रेवड़ी से भरा , देखो तो बाज़ार |
रानी हैं ये शीत की , इनका ये संसार |
इनका ये संसार , मूंगफली भी इतराए |
हलुआ गाजर ,मूंग ,स्वाद में रंग जमाये |
मक्का रोटी ,साग ,बगड ,गुड ,जमी चौकड़ी |
बढती मन में चाह , देखकर गज़क रेवड़ी |
डॉ अजय जनमेजय
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