२३-१२-
बूँदा- बांदी से बढ़ी ,बढ़ी और भी शीत |
शाला की छुट्टी हुई ,हुई खेल की जीत |
हुई खेल की जीत ,बनी पर बूंदे बाधा ||
घर के भीतर खेल,मज़ा आ पाया आधा |
गए नहीं मैदान ,नहीं की कूदा फांदी |
छुट्टी लेकर आज ,मिली पर बूँदा -बांदी |
डॉ अजय जनमेजय
बूँदा- बांदी से बढ़ी ,बढ़ी और भी शीत |
शाला की छुट्टी हुई ,हुई खेल की जीत |
हुई खेल की जीत ,बनी पर बूंदे बाधा ||
घर के भीतर खेल,मज़ा आ पाया आधा |
गए नहीं मैदान ,नहीं की कूदा फांदी |
छुट्टी लेकर आज ,मिली पर बूँदा -बांदी |
डॉ अजय जनमेजय
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